पीएम मोदी एआई ग्लास बॉक्स दृष्टिकोण

नई दिल्ली – ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026‘ में वैश्विक सहयोग का आह्वान करते हुए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने घोषणा की कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को “मानवता के कल्याण के लिए एक साझा संसाधन” होना चाहिए। भारत मंडपम में आयोजित पूर्ण अधिवेशन के दौरान विश्व के नेताओं को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि एआई सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए और ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) की आकांक्षाओं को अंतरराष्ट्रीय शासन के केंद्र में रखा जाना चाहिए।

कोविड-19 महामारी का उदाहरण देते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि जिस तरह दुनिया ने जीवन बचाने के लिए टीकों और डेटा को साझा करने में एकजुटता दिखाई, उसी तरह वैश्विक समुदाय को अब यह सुनिश्चित करने के लिए सहयोग करना चाहिए कि एआई प्रभुत्व का नहीं, बल्कि सशक्तिकरण का साधन बने।

नैतिक एआई के तीन स्तंभ

प्रधानमंत्री ने एआई के नैतिक उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए तीन प्रमुख सुझाव दिए, जो मानवीय मूल्यों और वैश्विक स्थिरता की रक्षा के लिए डिज़ाइन किए गए हैं:

  1. भरोसेमंद वैश्विक डेटा फ्रेमवर्क: “गर्बेज इन, गर्बेज आउट” के सिद्धांत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि एआई का परिणाम उतना ही विश्वसनीय होता है जितना कि वह डेटा जिस पर उसे प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने एक ऐसे ढांचे की वकालत की जो डेटा संप्रभुता का सम्मान करे और संतुलित जानकारी सुनिश्चित करे।
  2. ‘ग्लास बॉक्स’ दृष्टिकोण: पीएम मोदी ने उन “ब्लैक बॉक्स” एल्गोरिदम को समाप्त करने का आह्वान किया जहाँ आंतरिक तर्क छिपा होता है। उन्होंने एआई प्लेटफार्मों से “ग्लास बॉक्स” सुरक्षा नियमों को अपनाने का आग्रह किया—जिससे सुरक्षा प्रोटोकॉल पारदर्शी, प्रमाणित करने योग्य और जनता के प्रति जवाबदेह हों।
  3. मानवीय मूल्यों का समावेशन: “पेपर क्लिप समस्या” का उदाहरण देते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि भले ही तकनीक के पास शक्ति है, लेकिन दिशा हमेशा मनुष्यों द्वारा निर्धारित की जानी चाहिए।

भारत: एआई कंप्यूट का उभरता वैश्विक केंद्र

प्रधानमंत्री ने एक लचीला एआई बुनियादी ढांचा बनाने में भारत की तीव्र प्रगति पर प्रकाश डाला। ‘इंडिया एआई मिशन’ के तहत, देश में 38,000 जीपीयू (GPU) पहले से ही तैनात हैं, और अगले छह महीनों में 24,000 और जोड़े जाएंगे। यह बुनियादी ढांचा स्टार्टअप्स को नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत सस्ती दरों पर प्रदान किया जा रहा है।

इसके अलावा, भारत ने ‘एआई कोष‘ (राष्ट्रीय डेटासेट प्लेटफॉर्म) की स्थापना की है, जिसने राष्ट्रीय संसाधनों के रूप में 7,500 से अधिक डेटासेट और 270 एआई मॉडल पहले ही साझा किए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत के लिए तकनीक शक्ति का नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है।”

विशेषज्ञ विश्लेषण और वैश्विक प्रभाव

ग्लोबल साउथ पर प्रधानमंत्री का ध्यान उन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ मेल खाता है जो विकसित और विकासशील देशों के बीच “एआई विभाजन” (AI Divide) बढ़ने की आशंका जताते हैं।

डब्ल्यूएचओ की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने इस विजन पर टिप्पणी की: “मानवता की सेवा के रूप में एआई पर प्रधानमंत्री का जोर एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप है। पारदर्शिता और ‘ग्लास बॉक्स‘ दृष्टिकोण का समर्थन करके, भारत जिम्मेदार नवाचार के लिए एक मानक स्थापित कर रहा है जो केवल लाभ-प्राप्ति के बजाय नैतिकता को प्राथमिकता देता है।”

संवेदनशील एआई की ओर बदलाव

यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया जेनरेटिव एआई की तीव्र प्रगति से जूझ रही है। भारत ने लगातार ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के दर्शन से प्रभावित होकर “मानव-केंद्रित” दृष्टिकोण की वकालत की है। इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी करके, भारत खुद को पश्चिम के हाई-टेक नवाचारों और ग्लोबल साउथ की विकासात्मक जरूरतों के बीच एक सेतु के रूप में स्थापित कर रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का स्मरण करते हुए अपनी बात समाप्त की कि “सही समझ से ही सही क्रिया आती है।” उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जब तकनीक और मानवीय विश्वास साथ चलेंगे, तो एआई का वास्तविक प्रभाव पूरे विश्व में दिखाई देगा।