यमन में फिर भड़का गृहयुद्ध, तुर्बाह पर हूतियों का कब्जा, अब ताइज पर मंडरा रहा बड़ा खतरा

लाल सागर से ताइज तक हूतियों का दबदबा

सना। यमन में लंबे समय से जारी गृहयुद्ध एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दक्षिण-पश्चिमी यमन के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तुर्बाह शहर पर कब्जा कर लिया है। इसके बाद हूती अब प्रांतीय राजधानी ताइज की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। तुर्बाह पर कब्जे को सऊदी अरब समर्थित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के लिए बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है।

हूतियों की बढ़ती गतिविधियों के बीच यमन सरकार ने उनके खिलाफ बड़े सैन्य अभियान का ऐलान किया है। सरकार ने अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में सैनिकों की तैनाती और लामबंदी शुरू कर दी है। वहीं, सऊदी अरब ने भी यमन सरकार की सेनाओं को हरसंभव सैन्य सहयोग देने की बात कही है। करीब चार साल तक चले युद्धविराम के बाद दोनों पक्षों के बीच बढ़े तनाव ने यमन के गृहयुद्ध को फिर भड़का दिया है।

तुर्बाह पर कब्जे के बाद ताइज पर बढ़ा खतरा

रविवार को हूतियों ने तुर्बाह शहर पर नियंत्रण कर लिया। यह शहर उस महत्वपूर्ण मार्ग पर स्थित है, जो ताइज को बंदरगाह शहर अदन से जोड़ता है। अदन फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार का अंतरिम केंद्र है।

तुर्बाह में पिछले कई वर्षों से सरकारी बलों की महत्वपूर्ण सैन्य मौजूदगी रही है। इसी इलाके से सरकारी सैनिक ताइज की रक्षा के लिए हूतियों के खिलाफ मोर्चा संभालते रहे हैं। ऐसे में तुर्बाह का हाथ से निकलना सरकार के लिए सैन्य और रणनीतिक, दोनों लिहाज से बड़ा नुकसान माना जा रहा है।

हूती पहले ही ताइज के बाहरी इलाकों के कई गांवों और क्षेत्रों पर कब्जा कर चुके हैं। तुर्बाह पर नियंत्रण मिलने के बाद उनके लिए ताइज को अलग-अलग दिशाओं से घेरने का रास्ता और आसान हो गया है। ताइज यमन का तीसरा सबसे बड़ा शहर है और देश में इसका रणनीतिक महत्व काफी अधिक है।

लाल सागर के तट पर भी हूतियों की बढ़त

सितंबर की शुरुआत से हूतियों ने लाल सागर के पश्चिमी तट पर अपना अभियान तेज किया था। इस दौरान उन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मोखा शहर और लाल सागर के कई द्वीपों पर कब्जा कर लिया। इन इलाकों पर नियंत्रण से हूतियों की समुद्री रणनीतिक स्थिति मजबूत हुई है और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

बाब अल-मंदब दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। इस संकरे जलमार्ग से वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में किसी सशस्त्र समूह का इस क्षेत्र में प्रभाव बढ़ना केवल यमन तक सीमित खतरा नहीं है, बल्कि इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।

यमन सरकार ने किया बड़े सैन्य अभियान का ऐलान

यमन सरकार ने रविवार को बयान जारी कर हूतियों के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा की। सत्तारूढ़ प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के प्रमुख राशद अल-अलीमी ने टेलीविजन संबोधन में कहा कि अभियान का उद्देश्य हूतियों के कब्जे वाले क्षेत्रों को वापस लेना है।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यमन सरकार को समर्थन देने की अपील भी की। इसके कुछ ही घंटे बाद सऊदी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने यमन सरकार की सेनाओं को पूर्ण सैन्य सहयोग देने का भरोसा जताया।

सऊदी पक्ष ने स्पष्ट किया कि हूतियों के खिलाफ अभियान में यमन सरकार को पूरी परिचालन सहायता दी जाएगी। साथ ही सऊदी अरब ने हूतियों को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार भी जताया है।

मिसाइल और ड्रोन हमलों से बढ़ा तनाव

दोनों पक्षों के बीच तनाव पिछले कुछ महीनों में लगातार बढ़ा है। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, हूतियों की ओर से सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए जा रहे हैं। इन हमलों ने पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति को और गंभीर कर दिया है।

जुलाई के मध्य में तनाव ने नया रूप लिया, जब हूतियों ने सऊदी अरब पर यमन की राजधानी सना के हवाई अड्डे पर बमबारी करने का आरोप लगाया। हूतियों के मुताबिक, सऊदी अरब ने एक अनधिकृत ईरानी विमान को उतरने से रोकने के लिए एयरपोर्ट को निशाना बनाया था।

इसके बाद हूतियों ने सऊदी अरब और यमन में सरकारी बलों के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए। लाल सागर में सऊदी शिपिंग की नाकेबंदी की घोषणा के साथ सऊदी अरब से जुड़े कुछ जहाजों को भी निशाना बनाया गया।

तुर्बाह पर कब्जे से सरकारी बलों की सप्लाई पर असर

वॉशिंगटन स्थित इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के विश्लेषण के अनुसार, तुर्बाह पर हूतियों का कब्जा ताइज में तैनात यमन सरकार समर्थक बलों के लिए सैनिकों, हथियारों और जरूरी सामान की आपूर्ति को मुश्किल बना सकता है।

तुर्बाह के उत्तर में आने-जाने वाली सड़कों पर हूतियों का नियंत्रण बढ़ने से सरकारी बलों के लिए ताइज से पीछे हटने के रास्ते भी सीमित हो सकते हैं। ऐसे में तुर्बाह पर नियंत्रण केवल एक शहर पर कब्जे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर ताइज में चल रही सैन्य स्थिति पर पड़ सकता है।

2014 से जारी है यमन का गृहयुद्ध

यमन में गृहयुद्ध की शुरुआत 2014 में हुई थी, जब हूती विद्रोही अपने उत्तरी गढ़ से आगे बढ़ते हुए राजधानी सना में दाखिल हो गए थे। उन्होंने राजधानी पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद यमन सरकार को देश छोड़कर सऊदी अरब में शरण लेनी पड़ी।

वर्षों से जारी संघर्ष ने यमन को दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में शामिल कर दिया है। अब तक इस युद्ध में 1.5 लाख से अधिक लोगों की मौत होने का अनुमान है।

हालिया हिंसा ने संकट को और गहरा कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, ताजा संघर्ष में 800 से अधिक लोगों की मौत हुई है, जबकि 3,600 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी के मुताबिक, नए संघर्ष के कारण यमन के भीतर 1.45 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। वहीं, 3,000 से अधिक लोग समुद्र पार कर जिबूती पहुंच चुके हैं।

तुर्बाह पर कब्जे के बाद ताइज की ओर हूतियों की बढ़त और इसके जवाब में सऊदी समर्थित यमन सरकार के सैन्य अभियान ने देश में लंबे समय से चले आ रहे गृहयुद्ध को एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचा दिया है।